खुद को समझाने योग्य बाते
1.खुद को समझने मे लगा हूँ लोगो से कम बाते करने लगा हूँ
पता नही ऐसा क्यों करने लगा हूँ. शायद लोगो कि हकीकत को और करीब से पहचाने मे लगा हूँ
इस टूटे हुये आयने कि झूटी चमक से और भी रूब रु होने लगा हूँ.
शायद इसी लिये लोगो से कम बात करने लगा हूँ.
2.शायद मुझे लगता है कि मेरे जीवन का मुझसे ही कोई गिला सिकवा होगा. वरना इतना कौन परेशान करता है. गनीमत है सब्र मेरा अभी हरा नही हूँ.
2.शायद मुझे लगता है कि मेरे जीवन का मुझसे ही कोई गिला सिकवा होगा. वरना इतना कौन परेशान करता है. गनीमत है सब्र मेरा अभी हरा नही हूँ.
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